top of page
अर्चना श्रीवास्तव
खोज करे


यहीं ठहर जा
खुला आसमान, हरियाली, पक्षियों का संग। सुबह की किरण, शाम की लालिमा—सुकून से भरा हर पल। मन कहता है—यहीं ठहर जा।

अर्चना श्रीवास्तव
15 फ़र॰ 20251 मिनट पठन


विरासत
विरासत संपत्ति नहीं, प्रेम, स्नेह और कर्मयोगी बनने का सबक है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दीजिए, यही सच्ची विरासत है।

अर्चना श्रीवास्तव
9 फ़र॰ 20251 मिनट पठन


अरमान
ज़िन्दगी है छोटी अरमान हैं बड़े पूरे करूं भी तो कैसे | ये बढ़ती हुई मन की रोशनी ये ढलती हुई सांझ समय को पकड़ कर रक्खूँ भी तो कैसे । ये...

अर्चना श्रीवास्तव
9 फ़र॰ 20251 मिनट पठन


एहसास
कभी-कभी अपने होने पर भी भ्रम होता है । मै-मैं ही हूं या कोई और , सोचती कुछ हूं ,बोलती कुछ हूं, मतलब कुछ और निकलता है । हकीकत कुछ और...

अर्चना श्रीवास्तव
3 फ़र॰ 20251 मिनट पठन
bottom of page