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अर्चना श्रीवास्तव
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प्रभात पांडे जी की 'उमराव जान': एक सशक्त काव्य खंड
उमराव जान काव्य खंड समीक्षा - प्रभात पांडे जी की यह कृति समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श और सामाजिक संवेदना का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है। लखनऊ की संस्कृति का काव्यात्मक चित्रण।

अर्चना श्रीवास्तव
17 अग॰ 20253 मिनट पठन


धर्म
"एक हो ईश्वर तुम, एक ही आकार हो" - अर्चना श्रीवास्तव जी की यह मार्मिक कविता धार्मिक एकता का संदेश देती है। जानिए कैसे मजहब ने हमें बाँटा है और कैसे हम सभी एक ही परमपिता की संतान हैं।

अर्चना श्रीवास्तव
1 अग॰ 20251 मिनट पठन


शून्य
माताओं के रूप में व्यस्त जीवन में आत्मिक शांति पाना असंभव लग सकता है। अर्चना श्रीवास्तव की सुंदर हिंदी कविता 'शून्य' हमारे संघर्षों को मान्यता देती है और आध्यात्मिक सुकून की दिशा में प्रेरणा देती है। हर पारिवारिक महिला के लिए जरूरी।

अर्चना श्रीवास्तव
1 अग॰ 20251 मिनट पठन


कामरेडो को मूर्तिपूजा नही आती - श्री माधव कृष्ण जी का 'काव्य-संग्रह'
"कामरेडो को मूर्तिपूजा नहीं आती", श्री माधव कृष्ण की कविताएं समाज की गहराइयों में उतरती हैं — धर्म, राजनीति, गरीबी और मानवीय संवेदनाओं पर एक सशक्त दृष्टि डालती हुईं। हर कविता सोचने पर विवश करती है और पाठक को आत्ममंथन की ओर ले जाती है। इस संग्रह की कुछ पसंदीदा पंक्तियाँ और मेरी व्यक्तिगत अनुभूति इस ब्लॉग में साझा कर रही हूं।

अर्चना श्रीवास्तव
8 जुल॰ 20251 मिनट पठन
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