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अर्चना श्रीवास्तव
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फाल्गुनी बयार
फाल्गुनी बयार के स्पर्श से पेड़-पौधे मुस्कराने लगे, कोहरे की चादर हटी, मोजरें महक उठीं, और हवाओं में नई ऊर्जा जाग उठी।

अर्चना श्रीवास्तव
2 मार्च 20251 मिनट पठन


जइसे आमवाँ के मोजरा से रस चुवेला – भोजपुरी निबंध संग्रह की सजीव समीक्षा
भगवती प्रसाद द्विवेदी का 'जइसे आमवाँ के मोजरा से रस चुवेला' – भोजपुरी निबंध संग्रह, जहाँ लोकगीत, कहावतें और समाज की जीवंत झलक मिलती है।

अर्चना श्रीवास्तव
1 मार्च 20253 मिनट पठन


यहीं ठहर जा
खुला आसमान, हरियाली, पक्षियों का संग। सुबह की किरण, शाम की लालिमा—सुकून से भरा हर पल। मन कहता है—यहीं ठहर जा।

अर्चना श्रीवास्तव
15 फ़र॰ 20251 मिनट पठन


विरासत
विरासत संपत्ति नहीं, प्रेम, स्नेह और कर्मयोगी बनने का सबक है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दीजिए, यही सच्ची विरासत है।

अर्चना श्रीवास्तव
9 फ़र॰ 20251 मिनट पठन
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