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अर्चना श्रीवास्तव
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शून्य
माताओं के रूप में व्यस्त जीवन में आत्मिक शांति पाना असंभव लग सकता है। अर्चना श्रीवास्तव की सुंदर हिंदी कविता 'शून्य' हमारे संघर्षों को मान्यता देती है और आध्यात्मिक सुकून की दिशा में प्रेरणा देती है। हर पारिवारिक महिला के लिए जरूरी।

अर्चना श्रीवास्तव
1 अग॰ 20251 मिनट पठन


कामरेडो को मूर्तिपूजा नही आती - श्री माधव कृष्ण जी का 'काव्य-संग्रह'
"कामरेडो को मूर्तिपूजा नहीं आती", श्री माधव कृष्ण की कविताएं समाज की गहराइयों में उतरती हैं — धर्म, राजनीति, गरीबी और मानवीय संवेदनाओं पर एक सशक्त दृष्टि डालती हुईं। हर कविता सोचने पर विवश करती है और पाठक को आत्ममंथन की ओर ले जाती है। इस संग्रह की कुछ पसंदीदा पंक्तियाँ और मेरी व्यक्तिगत अनुभूति इस ब्लॉग में साझा कर रही हूं।

अर्चना श्रीवास्तव
8 जुल॰ 20251 मिनट पठन


मुखर-मौन – श्री हीरालाल अमृत पुत्र का भावपूर्ण काव्य संग्रह
‘मुखर-मौन’ श्री हीरालाल अमृत पुत्र का अद्वितीय काव्य-संग्रह है, जिसमें प्रेम, मातृत्व, देशभक्ति और आत्मिक ऊर्जा की झलक मिलती है। उनकी कविताएं भावों की गहराई में उतरती हैं और पाठक के मन को छू जाती हैं। संग्रह में “भावी बहु के प्रति” जैसी रचनाएं आत्मीयता से भरपूर हैं। यह पुस्तक पाठकों को न केवल संवेदना प्रदान करती है, बल्कि उन्हें सत्कर्म व देशप्रेम की ओर प्रेरित भी करती है।

अर्चना श्रीवास्तव
12 अप्रैल 20252 मिनट पठन


क्या लिखूं मैं
क्या लिखूं मैं? एक सवाल जो समाज की हर परत को छूता है—दर्द, भेदभाव, गरीबी और इंसानियत की गूंजती पुकार।

अर्चना श्रीवास्तव
11 अप्रैल 20251 मिनट पठन
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