सच कहूँ तुम मेरी कविता हो | एक प्रेम कविता
- अर्चना श्रीवास्तव

- 40 मिनट पहले
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सच कहूँ तुम मेरी कविता हो,
राग हो,अनुराग हो
जीवन का आधार हो तुम।
सच कहूँ तुम मेरी कविता हो
दर्द भी तुम मरहम भी तुम
जीवन का श्रृंगार हो तुम।
सच कहूँ तुम मेरी कविता हो
उद्देश्य भी तुम मंजिल भी तुम
जीवन का हर साज हो तुम ।
सच कहूँ तुम मेरी कविता हो
बंधन भी तुम उद्धार भी तुम
आत्मा की प्रकाश हो तुम।
सच कहूँ तुम मेरी कविता हो
कल्पना भी तुम साकार भी तुम
बढ़ते कदम का आधार हो तुम।
सच कहूं तुम मेरी कविता हो



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